आज शुभ दिन आया
मन हर्षाया
तन हर्षाया
फूलों में है नव मुस्कान
खुश हैं आज बाग बागान
पत्ते खुशी मनाते हैं
शीष अपना ये नवाते हैं
कोयल छेड़े नई तान
अंबर में गूंज रहा राष्ट्र गान
खुश है अवनी और आसमान
हुआ विकसित हिंदुस्तान।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'