अपने प्यारे हिंदुस्तान को छोड़कर
अपने स्वर्ग सा देश से मुंह मोड़ कर
कहां जाऊं मैं?
क्यों जाऊं मैं?
स्वदेश का प्यार कहीं मिल नहीं सकता
स्वदेश प्यार का बीज अन्यत्र खिल नहीं सकता
मेरा गांव मेरा देश
मेरा गांव मेरा भेष
मेरी गंगा मां
मेरी भारत मां
विदेश में मिल नहीं पायेगा
दिल मेरा दो टुक हो नहीं पाएगा
विदेश में दिल मेरा आह भरते रह जाएगा
विदेश में दिल मेरा फट जाएगा।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'