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"डिजिटल शिक्षकों की क्रांति: अंधेरों में उजियारा

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यह दास्तान है 2018 से पूर्व की,
        
                                                    
                            
जब शिक्षा था व्यापार बना।
तब छात्र था असहाय पड़ा,
श्रम से न वह पीछे हटा।
कोचिंगों की फीस देखकर वह ऐसे डरा,
सोच-सोचकर ,वह था व्याकुल से भरा।
अध्ययन को छोड़ ,वह अपने आलय को लौट चला,
अध्ययन भूल वह कामकाज में जुट पड़ा।
नियति मानकर वह सब सह पड़ा,
डिजिटल शिक्षा की बात सुन वह फिर उत्साह से भरा।
डिजिटल शिक्षा की महँगाई सुन वह चकित हुआ,

फिर वक्त 2019 का आरंभ हुआ।
डिजिटल शिक्षा हर छात्र के संग हुआ,
अलख सर, खान सर, दिगराज सर, प्रशांत सर, अंकित भाटी सर, गगन सर और विकास सर जैसे आदि शिक्षकों के बदौलत डिजिटल शिक्षा की फीस बहुत कम हुआ।
दीन छात्र के पढ़ने का सपना भी अब सच हुआ,
पैसों के कारण अध्ययन रुकना अब बंद हुआ।
अंबा-तात् का संताप भी अब अल्पमात्र हुआ,
अपनी संतान को शिक्षित देख उनका उद्यम भी फ़तह हुआ।
- अंकित कुमार

 
2 महीने पहले
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