ढूंढ़ रहे हो स्वर्ग ऊपर
है धरती पर
है यह घर पर
है यह स्वदेश में
है यह स्वभेष में
है यह परिवार में
है यह प्यार में
है बच्चों के अनुहार में
है यह गंगा की धार में
है यह जीत के हार में
है यह सदाचार में
है यह सच्चे साहित्यकार में
है यह इसी संसार में।
- सहज कुमार