सोने के टुकड़ों को अंबर ने बिखराया है
धरा को सुंदर सुंदर स्वर्ण कण से सजाया है
लगती धरती कितनी सुंदर
पेड़ पौधों से सजी सुंदर
दुल्हन जैसी यह धरा है
स्वर्ग से कौन अवनी पर उतरा है?
कि स्वर्ग लोक से सुंदरी अवनी का दर्शन करने आई है
संग सुंदर सुंदर अप्सराओं को धरा पर देखो लाई है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'