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ऋण चुकाओ तुम

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जिस मिट्टी में जन्म लिए उसका ऋण चुकाओ तुम
        
                                                    
                            
वनो वीर कभी नहीं हारो तुम, शत्रु को हराओ तुम
स्वदेश के लिए मर कर भी ऋण मातृभूमि का
ऋण जन्म भूमि का
आज चुकाओ तुम
कायरता को भगाओ तुम।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक घंटा पहले
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