सुबह सुबह आज संसार उठा
सुबह सुबह आज मां का प्यार उठा
बागान के सारे पुष्प अर्पित करता हूं मां!
अपने आपको समर्पित करता हूं मां!
प्यारे पुष्पों को क्यों तोड़ूं मैं?
क्यों न प्यार पुष्प से नाता जोड़ूं मैं?
मां कीजिए प्यार पुष्प स्वीकार
मां! मुझे दीजिए अपना आशीर्वाद और प्यार।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'