इधर घास
उधर घास
सुंदरता है पास पास
है इधर कपास
है उधर कपास
कपास,घास चहुंओर है
सुंदरता चहुंओर है
सुंदरता पोरे पोर है
हुआ हर हृदय में अंजोर है
चल उठ जवान हुआ भोर है
वन में नाच रहा मोर है
हुआ मस्त मन का कोर है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'