यह परीवर्तन शील संसार है
आज दुःख तो कल खुशियों का अंबार है
चुनौतियों को करना हमें स्वीकार है
कभी जीत,तो कभी हार है
कहीं जीत, तो कहीं हार है
कहीं कोमल कलियों का संसार है
तो कहीं रेत का अंबार है
कहीं इंकार,कहीं सत्कार है
यह परीवर्तन शील संसार है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'