विज्ञापन

होत न सब दिन एक समान

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            होत न सब दिन एक समान
        
                                                    
                            
कभी मिलता सम्मान
कभी मिलता अपमान
दोनों में रहो एक समान
बनो एक नेक इंसान
एक दिन जानेगा जहान
एक दिन छू लोगे आसमान
एक दिन जीतोगे जहान
बस कर्म करते जाओ महान
होत न सब दिन एक समान।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Aditya Mishra

1 कविता

View Profile

Ankit Kumar

10489 कविताएं

View Profile