होत न सब दिन एक समान
कभी मिलता सम्मान
कभी मिलता अपमान
दोनों में रहो एक समान
बनो एक नेक इंसान
एक दिन जानेगा जहान
एक दिन छू लोगे आसमान
एक दिन जीतोगे जहान
बस कर्म करते जाओ महान
होत न सब दिन एक समान।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'