विज्ञापन

ओ हिमालय!

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ओ मेरे हिमालय!
        
                                                    
                            
ओ मेरे साहसी हिमालय!
ओ मेरे ऊंचे हिमालय!
ओ मेरे प्यारे हिमालय!
तेरे कदमों में है हिंदुस्तान
तेरे जड़ों में है हिंदुस्तान
तेरे कदमों में है गंगा का मैदान
तू हिंद का मुकुट
तेरा मुकुट
है एवरेस्ट
जो करे न रेस्ट
है तू सोया सदियों से
तुम्हें जगा रहे हम सदियों से
जगो हिमालय हमारे
जगो हिमालय प्यारे
जगो, जगाओ हिंदुस्तान को
जगो, जगाओ जवान को।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ramesh Raj

25 कविताएं

View Profile

Junaid Ahmad

5 कविताएं

View Profile

Sooba Lal

1 कविता

View Profile