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नदी का संदेश

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पर्वतों से नदी निकलती है
        
                                                    
                            
तेज बहुत वह चलती है
शुरू में पतली वह लगती है
जब वह मैदान में बहती है
तब वह विस्तार लेती है
लंबी सांस वह लेती है
रुकती नहीं कभी चलती रहती है
नदी निरंतर बहती रहती है
है नदी का संदेश ," चलते रहो
बहते रहो,बहते रहो
रूकना अपना काम नहीं है
करना सदा आराम नहीं है
करना अभी आराम नहीं है।"
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
59 मिनट पहले
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