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नदी का संदेश

                
                                                         
                            पर्वतों से नदी निकलती है
                                                                 
                            
तेज बहुत वह चलती है
शुरू में पतली वह लगती है
जब वह मैदान में बहती है
तब वह विस्तार लेती है
लंबी सांस वह लेती है
रुकती नहीं कभी चलती रहती है
नदी निरंतर बहती रहती है
है नदी का संदेश ," चलते रहो
बहते रहो,बहते रहो
रूकना अपना काम नहीं है
करना सदा आराम नहीं है
करना अभी आराम नहीं है।"
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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32 मिनट पहले

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