विज्ञापन

गीता के श्लोक समझ में नहीं आते हैं

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरे सामने मेरा बेटा गया
        
                                                    
                            
लोग कह रहे हैं क्या गया
क्या हुआ?
कैसे कहूं क्या हुआ
क्या गया?
मेरे दिल का टुकड़ा गया
लोग कह रहे हैं कुछ नहीं गया
जाना तो सबको है
रहना यहां किसको है?
पर बाप के सामने बेटा का जाना
है वैसे ही जैसे हाथ से भाग्य का जाना
है वैसे ही जैसे कुछ देकर छिन ले जाना
फिर कहना जिसने दिया
वही लिया
गीता के श्लोक समझ में नहीं आते हैं
जब अपने सामने से चले जाते हैं
फिर वापस नहीं वे आते हैं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Aditya Mishra

1 कविता

View Profile