लगता मुझे मेरा मुजफ्फरपुर एक छोटा हिंदुस्तान
लगता मुझे मेरा मुजफ्फरपुर स्वर्ग से सुंदर स्थान
लगता मुझे मेरा मुजफ्फरपुर एक सुंदर जहान
जहां हैं सुंदर सुंदर ढेर सारे लीची के बागान
जहां हैं सुंदर सुंदर ढेर सारे मनमोहक मकान
जहां हैं एक सुंदर वातावरण जो छूता आसमान
जहां है साहित्यकार ऐसे जिनका नाम छूता आसमान
जहां हैं कवि कलाकार कितने बताना नहीं आसान
जहां गूंजते सहज कुमार के गौरव गान
जहां हैं एक सुंदर सहज कुमार का मकान
जहां है जार्ज फर्नांडिस का बहुत बड़ा योगदान
जहां हैं लोग प्यारे प्यारे रखते सबका ध्यान
जहां हैं नदी नाले और झील नदियां भरती उफान
जहां मिलता सुकून सदा स्वर्ग समान
जहां हैं आम अमरूद सब्जी जिन्हें गिनना नहीं आसान
जहां हैं ढेर सारे सुंदर सुंदर हर चीज के दुकान
जहां बसता हृदय मेरा है हृदय में ऊंचा स्थान
जहां है निराला निकेतन जैसे सुंदर मकान
जिस शहर को जानता जहान
उस सुंदर शहर को मेरा प्रणाम
उस सुंदर शहर को मेरा सलाम
उस सुंदर शहर को बारंबार
मेरा प्यार भरा नमस्कार
ओ मुजफ्फरपुर! करो मेरा नमस्कार
तुम आज अभी स्वीकार
हो तुम प्यार की बहती धार
तुमसे है सहज कुमार
सहज कुमार
से तुम हो
क्यों गुम सुम हो
बोलो
मुंह खोलो।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'