किस्मत हमसे रूठ गया,
वक्त क्यों पीछे छूट गया।
बचपन की वह यादें प्यारी,
हमने भी की शरारतें क्या न्यारी।
मुस्कुराहट की वह शाम निराली,
दोस्तों की वह बातें अतरौली।
- अंकित कुमार