हैं मेघ बड़े उदार
पानी उधार
धरा से लेकर
ताल तलैयों से लेकर
दे देते धरा को जैसे हो उपहार
मेघ करते धरा पर उपकार
देख मेघों को चमकते किसानों के अनुहार
मेघ! बरसो
मेघ! गरजो
बरसो बार बार।
- सहज कुमार