निकला मैं अकेले घर से
बन ठन कर संवर के
मिले लोग हजार
मिले कई बाजार
पर मैं भटका नहीं
मैं कहीं अटका नहीं
लोग कई आए
आईं कई समस्याएं
पर अंत में जीता मैं
पढ़ कर गीता मैं
सिद्ध है जो तपेगा
जो खपेगा
जंग वही जितेगा
इतिहास वही नया लिखेगा
जो निरंतर सिखेगा
जो नहीं बिकेगा
सफल वही दिखेगा
जो लक्ष्य पर टिकेगा
वक्त बुरा बितेगा
धैर्य जो रखेगा
फल वही चखेगा।
- सहज कुमार