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क्रांति के बीज

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            देश हमारा जब जब सोया
        
                                                    
                            
अपनी अस्मिता को तब तब खोया
अब नहीं हम सोयेंगे
क्रांति के बीज बोयेंगे
एक सूत्र में बंधेंगे
शुत्रुओं को वधेंगे
चलो खाएं कसम हम
नहीं कभी डरेंगे हम।
- सहज कुमार
2 महीने पहले
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