कहां थे कहां आ गए हम?
लक्ष्य से क्यों भटक गए हम?
भूल गए क्यों अपने संस्कार हम?
पाल लिए क्यों इतने विकार हम?
चलो सच्चाई को करें स्वीकार हम
चलो करें आत्म सुधार हम?
- सहज कुमार