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कागज के टुकड़ों के पीछे

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कागज के टुकड़ों के पीछे
        
                                                    
                            
सुंदर सुंदर मुखड़ों के पीछे
इंसान भाग रहा है
रात रात भर जाग रहा है
जीने के लिए मर रहा है
इंसान क्या क्या कर रहा है
कागज के टुकड़ों के पीछे
आत्मा से रीते रीते।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
6 दिन पहले
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Sanjai kumar

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