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जिओ स्वदेश के लिए

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस धरा पर
        
                                                    
                            
आकर
कुछ कर्म करो
कुछ कर्म करो
सत्कर्म करो
ओ नौजवानों!
ओ जवानों!
खुद को पहचानो
खुद को जानो
स्वदेश को जानो
करो कुछ स्वदेश के लिए
वे जिंदगी क्या जिए?
वे आए किसलिए?
नहीं जो जिंदगी जिए
स्वदेश के लिए
वे वृथा जिए
वे वृथा जन्म लिए
वही जीवन जिए
जो जिए
स्वदेश के लिए।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
8 घंटे पहले
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