इस धरा पर
आकर
कुछ कर्म करो
कुछ कर्म करो
सत्कर्म करो
ओ नौजवानों!
ओ जवानों!
खुद को पहचानो
खुद को जानो
स्वदेश को जानो
करो कुछ स्वदेश के लिए
वे जिंदगी क्या जिए?
वे आए किसलिए?
नहीं जो जिंदगी जिए
स्वदेश के लिए
वे वृथा जिए
वे वृथा जन्म लिए
वही जीवन जिए
जो जिए
स्वदेश के लिए।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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