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जिंदगी दो दिन की

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जीवन दो दिन के सपनों का बाजार है
        
                                                    
                            
जिंदगी में झगड़े रगड़े काट व मार है
मकान दुकान सामान सब साथ नहीं जाएगा
सब धरा का धरा,धरा पर ही रह जाएगा ।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक घंटा पहले
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