सारी धरती सारा आसमान
और सारे भगवान
को कागज करूं
और सारे वनों को लेखनी करूं
सारे संसार के जल को मसि करूं
तो भी लिखा न जाए हिंदुस्तान
का अनुपम अनोखा बखान।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'