सुबह सुबह जागो
फिर खूब तेज भागो
जीवन में भागा भागी है
दिन रात की जागा जागी है
तो भी समय कम पड़ जाता है
इंसान जीवन भर दौड़ लगाता है
कोई नौकरी के पीछे
कोई व्यापार के पीछे
कोई तन प्यार के पीछे
हूं मैं स्वदेश प्यार के पीछे
हूं मैं मानव प्यार के पीछे
चाह रहा हूं मैं रहूं न पीछे
स्वदेश मेरा कहीं रहे न पीछे?
ले जाना है हमें हिंदुस्तान को प्रथम स्थान पर
रख कर एकता अखंडता को प्रथम स्थान पर
जा सकते हैं हम स्वर्ग से ऊंचे स्थान पर
जहां लोग न तरसें रोटी कपड़ा मकान के लिए
जहां इंसान मरे इंसान के लिए
और प्यारे हिंदुस्तान के लिए
और सुंदर सा जहान के लिए
और अपने अपने भगवान के लिए
और मानव मुस्कान के लिए।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'