सूरज की किरणें पहले जहां आती हैं
चांदनी चांद की पहले जहां इतराती है
गंगा गोदावरी यमुना की जहां बहती धार
रंग रंग के पुष्प जिस देश का करते श्रृंगार
घर-घर में जहां गूंज रहा वेद मंत्रों का उच्चार
तरह तरह के पेड़ पौधों से सजी संवरी धरा जहां
आशीष देने अंबर से सितारे पसारे हाथ हैं जहां
वही हमारा हिंदुस्तान है
जहां खेत खलिहान हैं
जहां गंगा का मैदान है
जहां सबका ऊंचा स्वाभिमान है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'