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गांव और शहर

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शहर में सब कुछ है, पर शांति नहीं है
        
                                                    
                            
शहर में घर हैं बड़े बड़े, पर शांति नहीं है
शहर में धुआं है, गर्दा है,और है शोर
शहर में गली गली में घूमे चोर
गांव में सुकून बहुत है,हैं सीधे साधे लोग
गांव में हैं पेड़ पौधे, हैं भोले भाले लोग
गऊंवा में मन लागे
शहर से मन भागे
चल चलीं गऊंए की ओर
चल चलीं शहर के अंतिम छोर।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक महीने पहले
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