हो कोई शहर तो मुजफ्फरपुर जैसा हो
हो कोई बेहतर तो मुजफ्फरपुर जैसा हो
जहां बुढ़ी गंडक का किनारा हो
जहां राम नाम का जयकारा हो
शहादत खुदीराम बोस के नूर जैसा हो
हो कोई शहर तो मुजफ्फरपुर जैसा हो
जहां पावन पवन बहे
शहादत की बात कहे
हो कोई शहर तो कोहिनूर जैसा हो
हो कोई शहर तो मुजफ्फरपुर जैसा हो
दिनकर की कर्म स्थली को हम नित नमन करे
राजेन्द्र प्रसाद की कर्म स्थली का हम बंदन करें
आगमन इस शहर में पृथ्वी राज कपूर जैसा हो
हो कोई शहर तो मुजफ्फरपुर जैसा हो
जहां शाही लीची की मनमोहक महक को
सहज के क्रांतिकारी कविता की धमक हो
जहां घर-घर में शास्त्री जी का गीत गूंजे
जहां गरीब नवाज को लोग नित पूजे
हो कोई शहर तो मशहूर जैसा हो
हो कोई शहर तो मुजफ्फरपुर जैसा हो।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'