है यह दुनिया
सुंदर सी बगिया
रही यह धरती
नहीं कभी परती
हैं हम पुष्प सारे
हैं हम पुष्प प्यारे
हैं हम पुष्प न्यारे
हैं हम मही के तारे
इस मही को संवारें
है यही कर्म हमारे
हैं हम वीर सारे
हैं हम कोमल कठोर
हैं हम नहीं कमजोर
सारे संसार को स्वर्ग बनाना है
हमें अहं,ईर्ष्या,शत्रुता को हटाना है
हमें उपकार,प्यार बार बार दिखाना है
हमें धरा को स्वर्ग से सुंदर बनाना है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'