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किसी का टूटा फूटा सा सुंदर मकान

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            १९९० की है एक बहुत अच्छी बात
        
                                                    
                            
हुई धनबाद शहर से मेरी मुलाकात
मैं केंद्रीय विद्यालय में नौकरी पाया
पढ़ाने के लिए मैं धनबाद आया
मुझसे पहले पहुंचा वहां मेरा गांव
मुझसे पहले पहुंचा वहां मेरा छांव
ओल्ड डी वीएस बिल्डिंग आलिशान
मेरी पहली नौकरी मैं था जवान
२१ साल का लंबा कद का जवान
पानी के लिए लंबी कतार देखा
धनबाद शहर का बड़ा इंतजार देखा
धनबाद शहर का बड़ा प्यार देखा
मेरे गांव के लोग वहां करते थे ठेकेदारी
किसी की नौकरी पक्की सरकारी
किसी को मिला शहर की चौकीदारी
किसी का धन सच्चाई और ईमानदारी
कोई झूठा,छलिया दिखाए मक्कारी
देखा वहां बागी बलिया की हिस्सेदारी
किसी की ईमारत ऊंची आलीशान
किसी का टूटा फूटा सा सुंदर मकान
बच्चे बड़े बड़े बदमाश
रखते थे नंबर की आस
मैं पढ़ा कर मिटाता प्यास
मैं धनबाद में आया
कुछ नाम,कुछ दाम कमाया
शहर लगा अच्छा और सुंदर
लोग मिले मिलनसार और सुंदर
शहर धनबाद को भूलाऊं भला कैसे?
सोच रहा हूं मैं शहर दुबारा जाऊं कैसे?
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक महीने पहले
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