छंठवी तक प्रसाद जी पढ़े
उनकी रचनाएं एम.ए.में हम पढ़े
ऐसा कैसे हुआ?
संगति से हुआ
बाल्यावस्था से
कवियों के
संगति से
वे बने कवि महान
छोड़े वे साहित्य पर निशान
हम डिग्री लिए घूम रहे हैं
मालिकों के चरण चूम रहे हैं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'