सबको चाहिए यहां आज आजादी
पर मिलती कहां किसी को आजादी?
सभी फंसे हुए हैं,कोई नौकरी में,कोई व्यापार में
कोई किसी के प्रभाव में, कोई किसी के प्यार में
कोई बेवजह की तकरार में
कोई झगड़ा और मार में
कोई किसी के करार में
कोई कारागार के दीवार में
कोई संबंधों के प्यार में
कोई संबंधों के तकरार में
कोई अपने अहंकार में
कोई लोभ मोह के विकार में
बह रहे हैं सब तेज नदी की धार में
कट रहे हैं सब तोप तलवार की धार में
बह रहे हैं सब तेज तूफान के बयार में
है सबकी नैया अटकी बीच मझधार में
है कोई अस्पताल में
है कोई बुरे हाल में
है कौन अच्छे हाल में?
मुझे वे बताएं
मुझे वे समझाएं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'