कितना बदल गया इंसान ?
बेच दिया ईमान
बेच दिया पुश्तैनी मकान
बेच दिया खेत खलिहान
खरीद लिया शहर में मकान
खो दिया स्वाभिमान
आज का इंसान।
- सहज कुमार