विज्ञापन

बागी बलिया वाला मैं

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शीष मेरा कभी झुका नहीं
        
                                                    
                            
शीष झुकाना मैं कभी सीखा नहीं
विजयी अभियान कभी रुका नहीं
हारना मैं सीखा नहीं
हूं मैं मां गंगा के मैदान से
लड़ता हूं मैं साहस स्वाभिमान से
सीखता मैं पुर्वजों के बलिदान से
बागी बलिया वाला मैं
बागी बैरिया वाला मैं
गुदरी सिंह के टोला वाला मैं
मैं झुकूं कैसे?
मैं रुकूं कैसे?
रक्त नहीं,बहता है स्वाभिमान रग रग में
कमाऊंगा नाम मैं जीतूंगा जग में।
- सहज कुमार
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3565 कविताएं

View Profile