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हम राहे वफ़ा में युंही चलते रहे "अंजुम

Anjum Aligarhi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कटते हुए आवाज़ से पत्थर नहीं देखा।
        
                                                    
                            
तूने अभी अल्फ़ाज़ का नश्तर नहीं देखा।।

दानिस्ता किसी को कभी छुपकर नहीं देखा।
हमने तो नुमायां कोई मंज़र नहीं देखा।।

अक़वाम को देते हैं दिलासों पे दिलासे।
मंज़िल से मिलादे जो वो रहबर नहीं देखा।।

कांटों पे ही सोना है मेरा शौक़ वगरना।
तुमने मेरा फूलों भरा बिस्तर नहीं देखा।।

ऐ अब्रहा तू फ़ील की फ़ौजों पे है मग़रूर।
क्या तूने अबाबील का लश्कर नहीं देखा।।

हम राहे वफ़ा में युंही चलते रहे "अंजुम"।
हमने कभी भूले से भी मुड़कर नहीं देखा।।
-अंजुम अल हसन
एक महीने पहले
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