विज्ञापन

नीले आसमान को छू जाती थी।

Anju Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पंख
        
                                                    
                            

आसमान में उड़ती थी,
गाती थी खिलखिलाती थी।
सफेद नरम पंखों से,
नीले आसमान को छू जाती थी।

बरदाश्त ना हुई मेरी आज़ादी,
काट दिए गए मेरे सफेद पंख।
निराश नहीं हुई, उदास नहीं हुई,
फिर से उड़ना सीख जाऊँगी।

जब फिर आ जाएँगे मेरे सुंदर सफेद पंख,
नीले आसमान में उड़ती चली जाऊँगी।
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Adv DK Kanojiya

71 कविताएं

View Profile

Suresh Kumar

579 कविताएं

View Profile