वे हर कविता में
अपने ही हृदय की धड़कनों
में ढाल देती हैं,
हर कथा में
अपनी प्रतीक्षा का कोई भूला हुआ तट,
और हर चरित्र में
अपने ही अस्तित्व का कोई विस्मृत अंश,
संभाल लेती हैं !!
-अंजना चक्रपाणि मिश्र