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वक़्त आने पे खुल ही जाती है हक़ीक़त सबकी,'अदा'

Anita Dasani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपने फ़र्ज़ की राह से जो लोग मुकर जाते हैं,
        
                                                    
                            
ग़ैरों के साथ अपनी नज़रों में भी उतर जाते हैं।

अपनी करतूत से इतने शर्मसार हो जाते हैं
कि सामना करने से भी कतरा जाते हैं।

भूलकर अच्छे-बुरे की तमीज़ वो अक्सर,
अपनी ही फ़िज़ूल अना में इतरा जाते हैं।

शह पे जिनकी जो अपना हर काम निकालते हैं,
पल भर में ही उनके जज़्बात बदल जाते हैं।

जो अपने काम भी औरों के भरोसे छोड़ें,
वो टालने को ही अपनी फितरत बना पाते हैं।

वक़्त आने पे खुल ही जाती है हक़ीक़त सबकी,'अदा'
पहली नज़र में तो सब ख़ुद को वफ़ादार ही बता जाते हैं।
-अनिता दासानी,'अदा'
4 घंटे पहले
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