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प्रकृति गीत

Anita Dasani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर सिम्त आज हर रंग सुहाना सा लगता है,
        
                                                    
                            
गुनगुनाता हुआ खुशियों का तराना सा लगता है।

जल उठे जब से दीप कुछ उजाला लिए
ग़म का हर अंधेरा पुराना सा लगता है।

मुस्कुराने की वजह पूछ न हमसे ऐ दोस्त,
ग़म भी आज खुशियों का बहाना सा लगता है।

हर एक अहसास पुरनूर हवाओं का है
हर लम्हा मुकम्मल ज़माना सा लगता है।

छोड़ कर पीछे सभी रंज-ओ-अलम की राहें,
हर क़दम ख़ुशी की ओर रवाना सा लगता है।

हर खिला फूल, हर इक बन्द कली, कल-कल बहती नदियां,
रूह को जो दे सुकून वो अनमोल खज़ाना से लगता है

इस कदर छा गया है 'अदा' कुदरत का सुरूर आंखों पर
हर कोई उस खुदा की उल्फत में दीवाना से लगता है।
-अनिता दासानी 'अदा'
2 घंटे पहले
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