याद आई वो पहली बारिश
याद आई वो पहली बारिश,
भीगे थे जब सपनों के द्वार।
बूँदों ने चुपके से लिख डाला,
दिल पर पहला प्रेम-उपहार।
याद आई वो पहली बारिश,
जब तुम मेरे संग मुस्काए थे।
भीगी राहों पर चलते-चलते,
अनकहे वादे दोहराए थे।
याद आई वो पहली बारिश,
छतरी छोटी, अरमान बड़े।
एक छोर तुमने थाम रखा,
दूजे छोर थे मेरे खड़े।
याद आई वो पहली बारिश,
हर बूँद तुम्हारा नाम कहे।
भीगी पलकों की उस दुनिया में,
मन बस तुमको ही थाम रहे।
याद आई वो पहली बारिश,
अब भी सावन वैसा ही है।
बस हाथों की गर्माहट खोई,
और सफ़र कुछ तन्हा-सा है।
याद आई वो पहली बारिश,
स्मृतियाँ अब भी भीग रही हैं।
प्रेम कभी बूढ़ा होता नहीं,
बस आँखें चुपचाप कह रही हैं।
— अनिता चतुर्वेदी