रौशन था जब से हुआ, तेरे नयन का दीदार,
धड़कनों में बस गया, एक अनकहा-सा इश्क अपार।
कायनात की हर दिशा, तेरे ही रंग में ढल गई,
चाँद भी शरमा उठा, रात सितारों से सज गई।
बेकरार-सा मन मेरा, तेरी आहट सुनता रहा,
ख़ामोशियों के बीच भी, तेरा ही नाम चुनता रहा।
वादा था बस एक यही—साथ न छूटे उम्र भर,
धूप हो या छाँव कोई, हाथ रहे तेरा इधर।
आसमां भी झुक गया, प्रेम का उत्सव देखकर,
बादलों ने गीत गाए, चाँद मुस्काया ठहर-ठहर।
इश्क जब सच्चा हो, तो दूरी भी हार जाती है,
रूह की हर एक दुआ, मंज़िल स्वयं बन जाती है।
रौशन हो हर ज़िंदगी, ऐसा प्रेम का हो संसार,
दीदार से महके दिल, इश्क बने जीवन का आधार।
- अनिता चतुर्वेदी