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किसी की याद मेरे आस-पास रहती है

Anita Chaturvedi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            किसी की याद मेरे आस-पास रहती है
        
                                                    
                            

दिन भर की भागती हुई
ज़िंदगी के बीच,
जब अचानक मोबाइल की स्क्रीन
कुछ पल के लिए शांत होती है,
तब न जाने क्यों
तुम्हारी याद
सबसे पहले मेरे पास आती है।

शहर की भीड़ में
हज़ारों चेहरे गुजरते हैं,
लेकिन किसी अनजान चेहरे की मुस्कान में
तुम्हारा अक्स दिखाई दे जाता है,
और मैं भीड़ में होते हुए भी
कुछ पल के लिए
अकेली हो जाती हूँ।

कभी खिड़की पर ठहरी
बारिश की एक बूँद,
कभी शाम के आसमान में
बिखरा हुआ कोई रंग,
कभी कोई पुराना गीत—
बिना दस्तक दिए
तुम्हें मेरे भीतर उतार देता है।

अब तुम्हारा संदेश नहीं आता,
न कोई फोन बजता है,
फिर भी जाने कैसे
तुम्हारी उपस्थिति
मेरे आसपास बनी रहती है।

मेज़ पर पड़ी वही किताब,
जिसे कभी साथ पढ़ा था—
आज भी खोलती हूँ तो
शब्दों से पहले
तुम्हारी याद सामने आ जाती है।

मैंने बहुत कोशिश की
तुम्हें स्मृतियों से हटाने की,
पर यादें भी अजीब होती हैं—
जितना उन्हें दूर करो,
उतना ही भीतर उतरती जाती हैं।

अब तुम मेरे साथ नहीं,
फिर भी मेरे आसपास हो—
हवा की तरह,
जिसे छुआ नहीं जा सकता,
पर महसूस किया जा सकता है।

शायद यही प्रेम का
सबसे आधुनिक सच है—
रिश्ते बदल जाते हैं,
बातचीत बंद हो जाती है,
दूरियाँ बढ़ जाती हैं,
मगर किसी की याद
हमारे आसपास
यूँ ही रहती है—

जैसे कुछ रिश्ते खत्म होकर भी
हमारे भीतर से
कभी खत्म नहीं होते।

- अनिता चतुर्वेदी
2 महीने पहले
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