गीत~रिमझिम बरसे बादरवा
रिमझिम बरसे बादरवा, भीज गई डगरिया,
सावन गाए प्रेम-राग, महके हर नगरिया।
रिमझिम बरसे बादरवा...
डाली-डाली झूले पड़ गए, हँसती अमराइयाँ,
कोयल मीठे बोल सुनाए, जागीं तरुनाइयाँ।
पायल बाँधे पुरवैया, छेड़े मधुर बँसुरिया,
रिमझिम बरसे बादरवा...
भीगी मिट्टी महक उठी, मन का द्वार खुला,
बूंदों ने हर सूखी डाली पर हरियाला फूल खिला।
सपनों की नाव चली रे, लहर-लहर नदिया,
रिमझिम बरसे बादरवा...
दूर बसे पिया की यादें, भीगी चिट्ठी बन आईं,
बिजुरी जैसे नाम पुकारे, अँखियाँ भर-भर छाईं।
मनवा बोले धीरे-धीरे, आ जा रे साँवरिया,
रिमझिम बरसे बादरवा...
खेतों में मुस्काए धानी, गाए हल की तान,
धरती ओढ़े मेघ-दुपट्टा, धन्य हुआ किसान।
अंबर से आशीष बरसे, झूम उठी दुनिया,
रिमझिम बरसे बादरवा...
रिमझिम बरसे बादरवा, भीज गए सब भाव,
सावन केवल ऋतु नहीं है—जीवन का उत्सव-गान।
प्रेम, प्रतीक्षा, मिलन, विरह की एक ही सरगमिया—
रिमझिम बरसे बादरवा... भीज गई डगरिया।
- अनिता चतुर्वेदी