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बस यूँ ही नहीं उतरते

Anita Chaturvedi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बस यूँ ही
        
                                                    
                            

बस यूँ ही नहीं उतरते
मन-आकाश पर इंद्रधनुष,
हर रंग अपने भीतर
अनगिन तजुर्बे समेटे होता है।

ज़िंदगी कभी
धूप की चादर ओढ़ाती है,
तो कभी
मौन की वर्षा में भीगना सिखाती है।

जो क्षण हमें अक्सर
फिजूल लगते हैं,
समय वही चुपके से
भाग्य की इबारत बना देता है।

जो स्वप्न कभी
बरबाद दिखाई दिए,
वही आत्मबल की
पहली सीढ़ी बन जाते हैं।

हर ठोकर
एक नया अहसास जगाती है,
हर पीड़ा
भीतर कोई दीप जला जाती है।

इसलिए
विश्वास का दीप कभी
ख़त्म मत होने देना,

क्योंकि
सबसे घने अँधेरे के बाद ही
आकाश अपने सातों रंगों में
मुस्कुराता है।
- अनिता चतुर्वेदी
2 महीने पहले
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