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ज़िंदगी के हर मोड़ पर

anil shah

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हम बहते चलते रहे, ज़िंदगी के हर मोड़ पर,
        
                                                    
                            
सुना था कि साहिल मिलेगा, जो पार करा देगा।
पर आशियाना ही मेरा इतना कमज़ोर निकला कि,
इल्ज़ाम से ही मुँह मोड़ उठा।
— अनिल शाह
2 महीने पहले
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