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कॉलेज का सफ़र भी रंगीन होता है।

anil shah

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                            कॉलेज का सफ़र भी रंगीन होता है।
        
                                                    
                            

सब अनजान होकर भी नई शुरुआत कर लेते हैं।
नए दोस्तों के साथ अपना कमरा सजा लेते हैं।
कोई शहर से आता है तो कोई गाँव की मिठास साथ लाता है।
धीरे-धीरे यही बंधन प्यार से भी प्यारा हो जाता है।

पहले बातचीत आदर से शुरू होती है।
समय के साथ अपनापन इतना बढ़ जाता है कि हर बात मुस्कान का कारण बन जाती है।
इसी अपनत्व से रिश्ते और भी गहरे हो जाते हैं।

फिर एक-दूसरे को अपना कहकर जीवन भर का दोस्ताना बना लेते हैं।
छोटी-छोटी बातों से बड़े-बड़े सपने सजा लेते हैं।
कभी-कभी अपनी किताबों में भी दोस्तों की यादें संजो लेते हैं।

बचपन में केवल अपने कपड़ों तक ही दुनिया सीमित रहती है।
कॉलेज में दोस्तों की हर चीज़ भी अपनी लगने लगती है।

सीढ़ियों पर चढ़ना हो या कठिन राहों से गुज़रना,
दोस्त हर कदम पर साथ निभाता है।
गिरने पर संभालता है और मुस्कुराकर फिर आगे बढ़ना सिखाता है।

यदि किसी दोस्त पर कोई कठिन समय आ जाए,
तो पूरा हॉस्टल उसके साथ खड़ा दिखाई देता है।

कभी खुशियाँ पास होती हैं तो कभी ग़म।
फिर भी कॉलेज का हर सफ़र सुहाना लगता है।
कभी रात को ही दिन बनाकर सपनों को पूरा करने में लग जाते हैं।

परीक्षाएँ आते ही दिन और रात का अंतर मिट जाता है।
मेहनत ही मंज़िल तक पहुँचने का एकमात्र सहारा बन जाती है।

ड्रॉइंग पूरी करनी हो या असाइनमेंट जमा करना हो,
दोस्त एक-दूसरे की हर संभव सहायता करते हैं।
यही सहयोग जीवन की सबसे सुंदर सीख बन जाता है।

कभी कोई दोस्त प्रेम के एहसास में खो जाए,
तो बाकी दोस्त भी उसकी खुशियों में शामिल हो जाते हैं।

जब आख़िरी वर्ष आता है,
तो बिछड़ने का समय भी पास आ जाता है।
फिर भी किसी दोस्त का एक फ़ोन आए,
तो उससे मिलने के लिए हर व्यस्तता छोटी लगने लगती है।

यही कॉलेज का सफ़र है,
जो अनजान लोगों को अपना बना देता है,
और कुछ वर्षों की मुलाक़ात को
जीवन भर की दोस्ती में बदल देता है।
-अनिल शाह
2 महीने पहले
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