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गर्दिश में सितारा

anil shah

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अभी गर्दिश में है सितारा,
        
                                                    
                            
मेरे अंजाम को देख लेना।
कोई देखकर मुँह न मोड़ना इस महफ़िल में,
मुझ पर कोई इल्ज़ाम न देना।

ज़िंदगी इतनी बुरी नहीं हुई है
कि मेरा कोई हिसाब न कर देना।
दुखी क्यों रहते हो इस ज़िंदगी से,
सब कुछ मिलता है जुस्तजू से।

अपना मुकाम हम ख़ुद लिखते हैं,
किसी के भरोसे हम कहाँ जीते हैं।
तमन्ना कर कि कुछ न मिले,
ज़िंदगी इतनी बुरी नहीं कि ख़ुदगर्ज़ी में जले।

हम तो अपनी ज़िंदगी से मोहताज हैं,
पर यह दिखावा न करो कि हमसे कोई ज़्यादा बेबाक है।
मोहताज न बनो किसी के इतने,
कि ज़िंदगी से भीख माँगने लगो।

हम ज़माने से लड़ते हैं,
पर हर बात दिखाते नहीं हैं।
अभी रंजिश में हैं तराने,
फ़ुर्सत में बदलेंगी हवाएँ।

तू आवाज़ तो दे,
हम तक़दीर भी बदल सकते हैं।
हम वो हैं,
जो पत्थर को भी पानी में बदल सकते हैं।
-अनिल शाह
3 घंटे पहले
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