जब बारिश की रिमझिम बूँदें पड़ती हैं,
तो मन कुछ मचल-सा जाता है।
जैसे भीगी मिट्टी की भीनी-भीनी खुशबू,
और दारू के साथ चखना याद आ जाता है।