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दूर बहुत हैं

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कहते हैं साथ साथ हैं पर दूर बहुत हैं
        
                                                    
                            
रहबर ये काफिले के बे शऊर बहुत हैं
कई बार हार गए हम जीती हुई बाजी
किस्से कई तारीख में मशहूर बहुत हैं
दिवानों की मुश्किल वही पुरानी कहानी
जो चेहरे के हसीन हैं मगरूर बहुत हैं
माना है कुछ दिनों से अमन चैन शहर में
तबीयत खराब करने को नासूर बहुत हैं
मिलते रहे पैगाम हमें भी हर रकीब के
अपना जमीर है कि हम मजबूर बहुत हैं
दिल यूं तो मुसाफ़िर था फूलों की राह का
तकदीर में अपने मगर बारूद बहुत हैं
है बढ़ने का इरादा और इल्म भी हमें
फिसलन हमारी राहों में भरपूर बहुत हैं
3 महीने पहले
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